Webdunia: Portal - Search - Mail - Greetings   More >>
Support | Font Download | Feedback
Search  
Welcome, Guest  [ Register | Sign In ]

गुम है किसी के प्यार (रामपुर का लक्षमन)


गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह शाम
पर तुम्हे लिख नहीं पाऊँ मैं उसका नाम
हाय राम, हाय राम
कुछ लिखा?
हाँ
क्या लिखा?
गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह शाम
पर तुम्हे लिख नहीं पाऊँ मैं उसका नाम
हाय राम, हाय राम
अच्छा, आगे क्या लिखूं?
आगे?

सोचा है एक दिन मैं उसे मिलके
कह डालूं अपने सब हाल दिल के
और करदूं जीवन उसके हवाले
फिर छोड़ दे चाहे अपना बना ले
मैं तो उसका रे हुआ दीवाना
अब तो जैसा भी मेरा हो अंजाम
हो गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह शाम
पर तुम्हे लिख नहीं पाऊँ मैं उसका नाम
हाय राम, हाय राम
लिख लिया?
हाँ
ज़रा पढ़के तो सुनाओ न
चाहा है तुमने जिस बावरी को
वह भी सजनवा चाहे तुम्ही को
नैना उठाए तो प्यार समझो
पलकें झुका दे तो इकरार समझो
रखती है कबसे छुपा छुपा के
क्या?
अपने होटों में पिया तेरा नाम
हो गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह शाम
पर तुम्हे लिख नहीं पाऊँ मैं उसका नाम
हो गुम है किसी के प्यार में दिल सुबह शाम
पर तुम्हे लिख नहीं पाऊँ मैं उसका नाम
हाय राम, हाय राम


अस्वीकरण