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एक अजनबी, हसीना से


एक अजनबी, हसीना से, यूं मुलाक़ात, हो गई
फिर क्या हुआ, ये ना पूछो, कुछ ऎसी बात, हो गई
एक अजनबी ...

वो अचानक आ गई, यूं नज़र के सामने
जैसे निकल आया घटा से चाँद
चहरे पे जुल्फें, बिखरी हुई थीं
दिन में रात हो गई
एक अजनबी ...

जान-ऐ-मन जान-ऐ-जिगर, होता मैं शायर अगर
कहता ग़ज़ल तेरी अदाओं पर
मैं ने ये कहा तो, मुझसे खफा वो
जान-ऐ-हयात हो गई
एक अजनबी...

खूबसूरत बात ये, चार पल का साथ ये
सारी उमर मुझको रहेगा याद
मैं अकेला था मगर, बन गई वो हमसफ़र
वो मेरे साथ हो गई
एक अजनबी...


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