आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले
सूरज की पहली किरण से, आशा का सवेरा जागे (2)
चन्दा की किरण से धुल कर, घनघोर अँधेरा भागे (2)
कभी धूप खिले कभी छाव मिले
लम्बी सी डगर न खले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ दूर नज़र दौड़ आए, आजाद गगन लहराए (2)
जहाँ रंग बिरंगे पंछी, आशा का संदेसा लायें (2)
सपनों मे पली हंसती हो कली
जहाँ शाम सुहानी ढले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले
सपनों के ऐसे जहाँ में जहाँ प्यार ही प्यार खिला हो
हम जा के वहां खो जाए शिकुवा न कोई गिला हो
कहीं बैर न हो कोई गैर न हो
सब मिलके चलते चले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले
आ चल के तुझे, मैं ले के चलूं
इक ऐसे गगन के तले
जहाँ गम भी न हो, आंसू भी न हो
बस प्यार ही प्यार पले
इक ऐसे गगन के तले

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