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फूलों के रंग से दिल की कलम से

फिल्म: प्रेम पुजारी


फूलों के रंग से दिल की कलम से तुझको लिखी रोज़ पाती
कैसे बताऊँ किस किस तरह से पल पल मुझे तू सताती
तेरे ही सपने लेकर के सोया तेरी ही यादों में जागा
तेरे ख्यालों में उलझा रहा यूँ जैसे की माला में धागा
हाँ बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई कई बार
हाँ इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमे कई कई बार

सांसों की सरगम धड़कन की बीना सपनों की गीतांजलि तू
मन की गली में महके जो हरदम ऐसी जूही की कली तू
छोटा सफर हो लंबा सफर हो सूनी डगर हो या मेला
याद तू आए मन हो जाए भीड़ के बीच अकेला
हाँ बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई कई बार
हाँ इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमे कई कई बार

पूरब हो पश्चिम उत्तर हो दक्षिण तू हर जगह मुस्कुराये
जितना ही जाऊं मैं दूर तुझसे उतनी ही तू पास आए
आंधी ने रोका पानी ने टोका दुनिया ने हंसकर पुकारा
तस्वीर तेरी लेकिन लिए मैं कर आया सब से किनारा
हाँ बादल बिजली चंदन पानी जैसा अपना प्यार
लेना होगा जनम हमें कई कई बार
हाँ इतना मदिर इतना मधुर तेरा मेरा प्यार
लेना होगा जनम हमे कई कई बार
कई कई बार
कई कई बार



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